Motivational story in hindi for success

Motivational story in hindi – Normal लड़का बना Packaging industry का Ambani

Motivational story in hindi – नमस्कार दोस्तों, मैं अनिरुद्ध फिर से आपका स्वागत करता हूँ मेरे hindi blog TravelHindi.com पर| दोस्तों आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ एक motivational story in hindi | आज की hindi motivational story है Sudip Dutta की जो दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल से है| सुदीप दत्ता की कहानी आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो छोटी छोटी परेशानियों से हार मानकर ज़िन्दगी से हार मान लेते है और परिस्थितियों को कोसते रहते है|

आज की motivational kahani से आप सिख पाएंगे कि कैसे एक उद्देश्य को पूरा करने के लिए बड़ी सोच, पक्का इरादा और कभी ना हार मानने वाला जज्बा काम कर जाता है| आज की motivational story in hindi से आप ये भी सिख पाएंगे की ज़िन्दगी के हर मोड़ पर हमे कैसे मुसीबतों से निकलना है, कैसे उनसे जूझना है| तो चलिए शुरू करते है आज की motivational story in hindi for success |

Motivational story in hindi for success
Motivational story in hindi for success

Motivational story in hindi for success – कौन है Sudeep Dutta?

सुदीप के पिता इंडियन आर्मी में थे और युद्ध में गोली लगने के कारण वो paralysis stage में थे| ऐसे में घर में कमाने वाला सिर्फ सुदीप के बड़े भाई थे, जो खुद बीमारी से गुजर रहे थे| पिता की ऐसी हालत देखकर सुदीप के बड़े भईया टूट चुके थे और उनकी बीमारी में ठीक से इलाज ना होने के कारण वो चल बसे| सुदीप के बड़े भईया की मृत्यु के बाद सुदीप के पिता भी इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाए और उनकी भी मृत्यु हो गयी|

ऐसे में सुदीप के ऊपर उनकी माँ और चार भाई-बहनों की जिम्मेदारी आ गयी| आप खुद सोचिये उस समय सुदीप किस मानसिक स्तिथि से गुजर रहे थे| सुदीप को तब ये समझ नहीं आ रहा था की वो कैसे अपने परिवार को संभाले| अब तक तो वो पिताजी और भईया के चले जाने के दुःख से निकले ही नहीं थे की उन्हें रोज़ी-रोटी की चिंता सताने लगी| सोचिये उस समय उनकी मानसिक स्तिथि क्या रही होगी?

Motivational story in hindi for success – कैसे संभाला सुदीप ने अपने आप को और अपने परिवार को?

फिर सुदीप ने दुर्गापुर में रिक्शा चलाने का काम शुरू किया, और वो रेस्टोरेंट में waiter का काम भी करते थे| फिर थोड़े दिनों बाद वो अच्छे काम एक तलाश में मुंबई आ गए| मुंबई में शुरुवाती दिनों में उन्हें काम नहीं मिला इसलिए उन्हें दादर स्टेशन पर रात को सोना भी पड़ता था|

फिर धीरे धीरे दिन बीतता गया| लेकिन सुदीप ने हार नहीं मानी| और फिर वो कहते है ना “जो अपने आप से हार नहीं मानता उस से किस्मत हार मान लेती है”| ठीक ऐसा ही हुआ| सुदीप को एक packaging factory में काम मिल गया|

Businessman Motivational story in hindi – क्या है packaging factory? और कैसा था उन दिनों सुदीप का जीवन?

आपने tablets दवाइयों के packets को देखा होगा जो aluminium foils से बने रहते है या फिर ट्रैन से सफर करने के दौरान हमे जो aluminium foils में खाना मिलता है; तो इन सब foils को बनाने का काम इस factory में होता था|

फैक्ट्री में सुदीप को 15 रुपया रोज़ाना की मजदूरी पर रखा गया था और सोने के लिए एक common room दिया गया था जहाँ सभी मजदूर एक साथ सोते थे| कमरा इतना छोटा था की सोते समय हिलने-डुलने की जगह भी नहीं होती थी| मतलब आप कल्पना कीजिये की सोने के दौरान आप एक साइड से दूसरे साइड करवट भी नहीं ले सकते!!

सब कुछ ठीक चल रहा था| लगभग दो साल गुजर गए थे| लेकिन तभी उस फैक्ट्री के मालिक ने फैक्ट्री बंद करने का निश्चय किया क्योकि फैक्ट्री बहुत नुक्सान में चल रही थी और market से काफी पैसा क़र्ज़ लिया जा चूका था| ऐसे में वहाँ काम कर रहे सारे मजदूर रातो रात तबाह होने जा रहे थे| सब नौकरी छोड़ कर नई जगह जा रहे थे|

ऐसी कठिन परिस्थिति में सुदीप ने चौकाने वाला decision लिया| सुदीप ने फैक्ट्री को खुद चलाने का फैसला किया| इसके लिए सुदीप ने अपनी बचत की लगभग सारी सैलरी फैक्ट्री मालिक को देकर फैक्ट्री को खरीदना चाहा| बताया जाता है सुदीप ने उन दिनों 16,000 रुपये इकट्ठा किये थे| लेकिन ये राशि फैक्ट्री खरीदने के लिए बहुत ही कम थी|

Success story in hindi – सुदीप ने दिया फैक्ट्री मालिक को partner बनने का proposal

सुदीप ने 16000 रुपये के साथ साथ फैक्ट्री मालिक को एक नया proposal दिया जिसमे सुदीप ने आने वाले 2 साल का मुनाफा भी फैक्ट्री मालिक को देने का वादा किया| सुदीप के confidence और जज्बे को देखकर फैक्ट्री मालिक अंततः मान गया|

अब सुदीप उसी फैक्ट्री का मालिक बन चूका था जहाँ वो कुछ दिनों पहले तक एक सामान्य मजदूर था| सुदीप उन दिनों सिर्फ 19 साल का था|

Business success story in hindi – सुदीप का बिज़नेस प्लान

सुदीप फैक्ट्री का मालिक बन चूका था| चूँकि सुदीप कई सालो से एक मजदूर के तौर पर काम कर रहा था इसलिए उसके पास experience की कोई कमी नहीं थी| उन दिनों aluminium packaging company का बुरा दौर चल रहा था| यहाँ तक की India foils Ltd. जैसी बड़ी company भी बंद पड़ी थी| उन दिनों Zindal aluminium जैसी कुछ गिनी चुनी company अपने brand name के कारण मार्केट में चल रहे थे|

उन दिनों Zindal जैसी बड़ी कंपनी के सामने टिक पाना बहुत मुश्किल था| लेकिन सुदीप ने हार नहीं मानी| सुदीप ने छोटी मोटी कंपनी से आर्डर लेना जारी रखा और मार्केट रिसर्च करते रहे|

सुदीप इस दौरान अपने फैक्ट्री के उत्पाद के बारे में बड़ी बड़ी कंपनी को बताते थे| चूँकि सुदीप के फैक्ट्री के पास बेहतर उत्पाद और नयापन था इसलिए कई कंपनी interest लेने लगी|

Motivational story in hindi – सुदीप की मेहनत रंग लाई

सुदीप की कोशिश जारी थी| और किसी ने सही भी कहा है कि ‘आपकी मेहनत बेकार नहीं होती और कोशिश करने वालो की हार नहीं होती’| फिर धीरे धीरे सुदीप को Nestle, Sun pharma, Cipla जैसी बड़ी company से order मिलने शुरू हो गए| और सुदीप इस बार मार्केट में खड़े हो गए| सुदीप की कंपनी Ess Dee aluminium ltd. मार्केट में अपनी जगह बना चुकी थी|

लेकिन वो कहते है ना जब आप खड़े होते हो तो आपको बैठाने/गिराने वाले सामने बहुत आते है| अब ये आपके ऊपर है की आपको बैठना/गिरना है या खड़े होते हुए चलना है या रौंदकर चलना है| अगर आप किसी भी तरह चले तो टिक पाओगे वरना मार्केट से गायब हो जाओगे!!

Business story in hindi – सुदीप के सामने competitors आ चुके थे

सुदीप के साथ भी कुछ ऐसा हुआ| सालो से बंद पड़ी India foils ltd. कंपनी को Vedanta group ने खरीद लिया और मार्केट में खड़ा कर दिया| अब Zindal के बाद ये दूसरा बड़ा competitor मार्केट में खड़ा हो चूका था| सुदीप किसी तरह India foils को हासिल करना चाहते थे| लेकीन इस से पहले Vedanta ने India foils को अपने नाम कर लिया|

लेकिन सुदीप डगमगाएं नहीं, बल्कि अपने फैक्ट्री के उत्पाद पर ज्यादा ध्यान दिया और अलग अलग packaging concept और products बनाकर मार्केट में डटे रहे| अंततः Vedanta packaging field में टिक नहीं पायी और Vedanta packaging market में loss में चलने लगी| और फिर सुदीप ने India foils ltd. का 90% हिस्सा अपने नाम कर लिया| इस deal के बाद Vedanta packaging मार्केट से पूरी तरह से गायब हो गयी|

इस बार सुदीप दोबारा खड़े हुए और packaging industry के ‘Guru’ कहलाने लगे| साल 2000 तक सुदीप ने 20 से भी ज्यादा production unit स्थापित कर लिया था और उनकी कंपनी Ess Dee aluminium ltd. Pharma packaging market में Top पर rank कर गई|

आज सुदीप के कंपनी shares Bombay stock exchange और National stock exchange में भी मौजूद है|

Final words-

दोस्तों तो ये थी आज की motivational story in hindi जो हमे बहुत कुछ सिखाती है| आज की motivational kahani हमे ये सिखाती है की skills और जूनून के सामने बड़े बड़े degrees भी नहीं टिकते| सुदीप market research में माहिर थे| उन्हें ये पता था की मार्केट में कब क्या चल रहा है, और फैक्ट्री में मज़दूर के तौर पर उनके पास सालो का experience भी आ चूका था|

सुदीप के पास जूनून के साथ साथ बहुत बड़ा दिल भी है इसलिए आज उनकी NGO Sudeep Dutta foundation गावों के जरूरतमंद युवाओं के लिए काम कर रही है|

आज के लिए सिर्फ इतना ही| मैं बहुत जल्द एक और नए interesting article के साथ TravelHindi.com पर हाज़िर होऊंगा| तब तक के लिए TravelHindi.com के और भी articles पढ़े और मेरे साथ बने रहे|

– अनिरुद्ध

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